Pradeep Kumar

Pradeep Kumar

Founder, Editor-in-chief,Writer and PRO of Apna Gharaunda
  • प्यासे

    पानी के प्यासे रेगिस्तान मेंरह रहकर मिराज देखते जैसेप्रेम के प्यासे जिंदगी मेंरह रहकर देखते दोस्त ©प्रदीप कुमार।।अपना घरौंदा

    Read More »
  • झेंपना

    आंखे झेंप कर बातें करने वाले लोग,काफी प्यारे होते हैं जैसेप्यारे होते हैं नवजात शिशु,जो आंखें बंद करके भीअपनी मां…

    Read More »
  • ट्रैफिक

    जब जिंदगी काफी तेजी से चलेतो रुको,सड़कों पर चलती तेज गाड़िया भीरुकती है, रैड सिगनल परपार होने दो,हर दुःख, हर…

    Read More »
  • लड़कियां प्रेम नहीं साहस करती है।

    लड़कियां प्रेम नहीं साहस करती है। इस समाज में जहां लड़कियों को पर्दे के पीछे, घूंघट या बुर्क़े के अंदर…

    Read More »
  • रिलेशनशिप और कला

    रिलेशनशिप, में आपकी कला के कोई मायने नहीं है। आप में कितनी स्किल है या आप क्या करते हैं, यह…

    Read More »
  • मैं नहीं जानता

    कितना और इंतजार बचा हैतेरे और मेरे मिलने में जब से बिछड़े हैकेवल यादें ही तो है तेरी रोज सपनों…

    Read More »
  • प्रेम की तलाश का दुःख

    मुझे बेहद दु:ख हो रहा है।यहां से निकलने का… मगर खुशी है निकल रहे हैं अब भागेंगे सीधा। इस शहर…

    Read More »
  • हकीकत

    हकीकत तुम, मेरे स्वप्न मेंज्यादा खूबसूरत लगती होऔर हकीकत में मुझेतुमसे भय लगता है ©अपना घरौंदा से प्रदीप कुमार की…

    Read More »
  • एक एहसास

    एक एहसास है,दिल के अंदर, मन है खाली,दिल खुला समंदर। तुम्हें बताने है, कुछ बातें, अल्फाजों से बयान नहीं होती…

    Read More »
  • मैं राधा नहीं

    मैं राधा नहीं,एक आम गोपी हूं। कवियों ने ‘राधा’ नाम नहीं दियाइसीलिए बेनाम गोपी हूं। मैं तो कृष्ण के प्रेम…

    Read More »
Back to top button
Close
Close