Love Poetry

  • प्यासे

    पानी के प्यासे रेगिस्तान मेंरह रहकर मिराज देखते जैसेप्रेम के प्यासे जिंदगी मेंरह रहकर देखते दोस्त ©प्रदीप कुमार।।अपना घरौंदा

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  • झेंपना

    आंखे झेंप कर बातें करने वाले लोग,काफी प्यारे होते हैं जैसेप्यारे होते हैं नवजात शिशु,जो आंखें बंद करके भीअपनी मां…

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  • महामारी के दौर का प्रेम

    आज सोचा कलम उठती हूंऔर पन्नों को इस दूरी के दर्द से सजती हूंप्यार साथ रह कर बहुत कियाअब दूर…

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  • मैं नहीं जानता

    कितना और इंतजार बचा हैतेरे और मेरे मिलने में जब से बिछड़े हैकेवल यादें ही तो है तेरी रोज सपनों…

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  • हकीकत

    हकीकत तुम, मेरे स्वप्न मेंज्यादा खूबसूरत लगती होऔर हकीकत में मुझेतुमसे भय लगता है ©अपना घरौंदा से प्रदीप कुमार की…

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  • मैं राधा नहीं

    मैं राधा नहीं,एक आम गोपी हूं। कवियों ने ‘राधा’ नाम नहीं दियाइसीलिए बेनाम गोपी हूं। मैं तो कृष्ण के प्रेम…

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  • मैं नहीं लिख सकता

    मैं नहीं लिख सकता।मेरी दोस्त,मैं तुमपर कुछ नहीं लिख सकता।एक कविता लिखनी चाही थी, मैंनेजिसमें तुम होती, तुम्हारा जिक्र होता।…

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  • आलोचना! १

    https://wp.me/p9APwI-11 भैया श्री विशाल ‘स्वरूप’ ठाकुर से मैंने गुज़ारिश की थी कि वे एकतरफा प्रेम पर अपनी राय रखे।मैंने जब…

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  • एक पागल सी लड़की

    एक पागल सी लड़कीपागलों की तरह तुम्हें चाहती है तुम्हारी बात मैं अपनीपूरी दुनिया दे जाती हैडर क्या है, पता…

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  • Photo of तिलिस्म-ए-झूठ

    तिलिस्म-ए-झूठ

    तिलिस्म-ए-झूठ, रचा मेरे आस-पास। पास है मेरी दोस्त, जान-ए-बहार की आस। आस है उसकी, जिसकी परछाई भी न पास। परछाई…

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