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एक एहसास

एक एहसास है,दिल के अंदर,
मन है खाली,दिल खुला समंदर।
तुम्हें बताने है, कुछ बातें,

अल्फाजों से बयान नहीं होती यह बातें,
शब्दों से आखिर कैसे बताऊं यह ज्जबातें।
एक एहसास है दिल के अंदर मन है खाली दिल खुला समंदर।

आखिर क्यों आया है मेरी जिंदगी में यह एहसास,
जिसके इज़हार में हो रहा अलग ही इंसाफ।

बढ़ते कदम तुम्हारी ओर है,
लेकिन मेरी वाणी में नहीं कोई शोर है।

तैयारी करके आया था बहुत कुछ,
लेकिन देख सामने तुम्हें हो गया निः शब्द सा कुछ।
अब वापस समेटने की कोशिश कर रहा बातों को कुछ-कुछ।

धीमी आवाज़ में ही सही
अब मैं यह इज़हार कर ही देता हूं।
ऐसी बात अंतर्रात्मा ने मुझे बतलाई।
अब बोल दो,कह दो,अब बता ही दो,सुना ही दो।
अपनी अंदर छुपी हुई,दबी हुई हर वो बात।
जिसे तुम थे काफी वक्त से कहना चाहते।

तभी अचानक किसी ने टोका,
सामने देखा तो हुआ भौंचक्का।
भूल ही गया था,
खड़ी थी मेरे ही सामने उस एहसास की श्वसास।

जो अब कहने लगी है अपनी ही कुछ बात,
शायद उसे भी कुछ कहना था,
मगर कहने को उसके पास भी हिम्मत का न होना था।
मैंने सोचा मैं ही कहूं,उसने सोचा की वो कहे।

आंखें एक दूसरे में अब रमते- रमते,
कहते हुए समहते-समहते।

अब बारी मेरी थी,
लफ़्ज़ों को बयान करने की।
पता नहीं लोग क्या कहते होंगे इस समय,
खैर अब समेटते हुए अपनी बात शुरू की।

सुन रही हो न,मैं तुमसे हूं कुछ कहना चाहता,
सिर हिला उसने इशारा किया,कहो कहना क्या चाहते हो।
कहते-कहते क्यों यूं चुप हो जाते हो।
अब बोलो भी आगे,कहो भी आगे।

आंसू अब इस नयन से उस नयन तक बहने लगे हैं,
वक्त और हालत भी खुद को थामने लगे हैं।

अब शायद किसी को न कुछ कहना-सुनना था,
बस हम दोनों को यूं ही एक-दूसरे में रमना था।

दोनों की आंखों ने कर ली थी,
सारी लफ़्ज़ों की बात।
अब बढ़ रहे हैं खाली ज्जबात।

दोनों के होंठ सील पड़े हैं,
हाथों में हाथ लिए दोनों चल पड़े हैं।

एक एहसास जो था दोनों अंदर।

Pradeep Kumar

Founder, Editor-in-chief,Writer and PRO of Apna Gharaunda
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