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रिलेशनशिप और कला

रिलेशनशिप, में आपकी कला के कोई मायने नहीं है। आप में कितनी स्किल है या आप क्या करते हैं, यह भी कोई मायने नहीं रखता। आप कौन हैं? एक वॉचमैन हो या सुपर मॉडल कुछ मायने नहीं रखता। प्रेम पर कविताएं गढ़ते हो, लेख लिखते हो, कहानियां लिखते हो, या कोई प्रेम पर फिल्म ही क्यों न बनाते हो। रिलेशनशिप में कुछ मायने नहीं रखता।

कभी न कभी, किसी न किसी स्थिति में आपके रिलेशनशिप टूट सकता है। आप गमों में जीने लग सकते हैं।

चाहे, शिव कुमार बटालवी हो, चाहे गुरु दत्त सब टूटे। सब ‘प्यासे’ रह जाते हैं। गुरु दत्त के अपनी पत्नी के लिए चीखते हुए, मर गए। उनका फिल्मकार होना, उनके रिश्ते को न बचा सका। बल्कि, यह वजह बन गया।

हम हमेशा प्रेम हासिल करने की कोशिश करते हैं। और इस प्रयास में नई-नई कला सीखते हैं। ताकि, आप जिससे प्रेम करते हैं, वो आपके तरफ आकर्षित हो सके। कुछ डांस, कुछ गिटार थाम लेते हैं। ग़र यह सब न हो सके तब व्हाट्सप शायरियों से कैसे अपने साथी को प्रभावित करें, वो यू ट्यूब पर वीडियो देख। कुछ बकैत वही पेलने लगते हैं।

यहां तो अमृता प्रीतम इतनी एक बेहतरीन कवयित्री की कविताएं उनके काम न आ सकी। तो तुम किस खेत की मूली हो!

अब मायने क्या रखता है?

रिलेशनशिप में मायने रखता है, ‘प्रेम’। आप अपने प्रेमी या प्रेमिका से कितना प्रेम करते हैं। यह मायने रखता है। मायने यह रखता है कि आप उनकी दिल से कैसे जुड़े? उन्हें असल जिंदगी में समझने की कोशिश करें। ख्याली पुलाव पकाकर कोई फायदा नहीं। आप अपने ख्यालों में उनका चरित्र गढ़ के उनके बारे में कविताएं लिखकर कोई फायदा नहीं।

प्रेम अपने लेखन से चुराकर, सामने असलियत में आपके सामने मौजूद हैं। उसपर लुटा दीजिए। जो चीजें आप पर्दों पर दिखाने में लगे हैं। दुनिया को यह बताने में लगे हैं, यही प्रेम है। ऐसे ही रिश्ते होते हैं। ज़रा पर्दे के सामने जो शख़्स तुम्हारी फिल्म देख रहा/रही है। उसके और तुम्हारे बीच का जो रिश्ता है। उसे अपने जीवन पर्दे पर उकैर कर के तो देखो।

तुम्हारी रिलेशनशिप प्रेम कला के मायने पर चलती है। तो अपनी कला का प्रदर्शन करो।

  • प्रदीप कुमार
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Pradeep Kumar

Founder, Editor-in-chief,Writer and PRO of Apna Gharaunda

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