PoetryScientific Poetry

संयोग

जब एक तितली महासागर के ऊपर पंख फरफराती है।
तब यही घटना महादेशों में तूफान लेकर आती है।

यही संयोग कहलाती है।

संयोग को कईयों ने कई नाम दिए।
सभी नामों के पीछे एक संयोग हुए।

संयोग वो घटना है,
जो सृष्टि की शुरुआत में हुई।
संयोग वो घटना होगी,
जो सृष्टि के अंत में होगी।

हर पल घटती घटना हो,
चाहे हमारा मिलना,
चाहे तुम्हारा,
इसी घड़ी,इसी समय,इसी पल,
मेरी कविता का पढ़ना हो,
सब संयोग है।

क्यों?
क्योंकि धरती पर जब एक उल्कापिंड गिरा।
यह संयोग ही था,
जिसने एक सभ्यता का नाश कर,एक को मौका दिया।
संयोग की हर एक घटना दिन प्रतिदिन घटता गया।

जैसे-जैसे,
शिखर की चोटी से बर्फ का एक छोटा गोला गिरता जाता है।
वैसे-वैसे
वह गोला धीरे-धीरे बर्फ के छोटे अंशों से चिपक कर बड़ा होता जाता है।

मेरी दोस्त हमारा मिलना भी एक संयोग था।
संयोग कि
संयोगवश तुम्हारे माता-पिता एक दूसरे से मिले
संयोग कि
संयोगवश मेरे माता-पिता आपस में मिले
फिर संयोग कि घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ।

और सृष्टि के नियमों से हमारा मिलना हुआ।

यह जो संयोग है, यूं ही चलता रहेगा।
और हमारे मिलने के बाद भी, एक संयोग होगी।
और उसकी भी अद्भूत संयोग की कहानी होगी।

Tags

Pradeep Kumar

Founder, Editor-in-chief,Writer and PRO of Apna Gharaunda

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button
Close
Close